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संघ यात्रा संगठन व सेवा के 100 वर्ष
























संघ यात्रा : संगठन व सेवा के 100 वर्ष
प्रस्तावना- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर लिये है। संघ की स्थापना पूजनीय डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी ने विक्रमी संवत 1982 की विजयदशमी (27 सितंबर, 1925) को नागपुर (महाराष्ट्र) में की थी। संघ स्थापना का उद्देश्य संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित कर हिंदुत्व के अधिष्ठान पर अपने इस भारत राष्ट्र को समर्थ और परम वैभवशाली बनाना है। इस महत्वपूर्ण कार्य हेतु गुणवान एवं समर्पित कार्यकर्ता आवश्यक थे। ऐसे कार्यकर्ता निर्माण के लिए डॉ. हेडगेवार ने एक सरल किंतु अत्यंत परिमाण कारक दैनन्दिन 'शाखा' की पद्धति संघ में विकसित की। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संघ के स्वयंसेवक गत 100 वर्षों से वर्षों से समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय है और प्रयत्न कर रहे हैं। यह यात्रा एक रोचक कहानी है। संघ उपहास, विरोध के मार्ग को पार कर स्वीकृति एवं समर्थन की प्राप्ति की स्थिति में पहुंच गया है।

     आज संघ कार्य सर्वदूर, सभी क्षेत्रों में पहुंचा और प्रभावी बना है। देश भर में 51740 स्थान पर 83129 दैनिक शाखाएं तथा अन्य 26460 स्थानों पर 32147 साप्ताहिक मिलनों के माध्यम से संघ कार्य का देश व्यापी विस्तार हुआ है, जो लगातार बढ़ रहा है। स्वयंसेवक अपनी क्षमता के अनुसार सामाजिक समस्याओं व चुनौतियों के समाधान करने में स्वयं से लगे हुए हैं।आज संघ स्वयंसेवक समाज के सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन के विषयों पर ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में 1,29,000 सेवा कार्य व गतिविधियां चला रहे हैं। समाज परिवर्तन के इन प्रयासों में समाज का भरपूर सहयोग और समर्थन मिल रहा है। संघ के स्वयंसेवक अपने परिवार में संघ जीवन शैली को अपनाते हुए समाज अनुकूल परिवर्तन करने का प्रयास करते हैं। साथ ही व्यापक समाज परिवर्तन के लिए विभिन्न प्रकार के उपक्रम नियमित रूप से करते रहते हैं। 



शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन- 

1. सामाजिक समरसता, 
2. पर्यावरण संरक्षण, 
3. कुटुंब प्रबोधन, 
4. स्व आधारित जीवन, 
5. नागरिक कर्तव्य बोध, 

     इन विषयों पर परिवर्तन हेतु जन जागरण के प्रयास चलेंगे। यह आज की परिस्थितियों में आवश्यक है। शताब्दी वर्ष के बाद भी यह उपक्रम निरंतर चलते रहेंगे। 

     जब हम वर्तमान परिदृश्य का विचार करते हैं तो भारत का भविष्य उज्जवल दिखाई देता है, लेकिन अनेक चुनौतियां भी सामने खड़ी है। उन चुनौतियों का समाधान भी समाज को संगठित होकर करना होगा। तभी भारत सामर्थ्यशाली बनेगा। संघ शताब्दी के इस वर्ष में स्वयंसेवक वर्षभर अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में संपर्क करेंगे। इस निमित्त विजयादशमी उत्सव, घर-घर संपर्क, हिंदू सम्मेलन, प्रमुख - जन गोष्ठियां, सामाजिक सद्भाव बैठकें तथा युवाओं के कार्यक्रम होने वाले हैं। इस पुस्तक में संघ की 100 वर्षों की यात्रा, वर्तमान परिदृश्य, चुनौतियां और भूमिका और पंच परिवर्तन के बारे में बताया गया है। समाज के चिंतन के लिए यह पुस्तक आपके हाथों में है। इस पुस्तक के विषय घर-घर व्यक्ति-व्यक्ति के अंत:करणों में पहुंचे और हमारे व्यवहार में आए, यही इसका उद्देश्य है। विश्वास है, हम इसमें सफल होंगे।

दत्तात्रेय होशबाले 
सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 

तिथि: विक्रम संवत् 2082, भाद्रपद शुक्ल एकादशी 
(तदनुसार 3 सितंबर 2025)

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

अति सुन्दर

सुरेश दत्त राय ने कहा…

संघ स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने की शुभकामनाएं।