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स्वामी विवेकानंद

                स्वामी विवेकानंद 

                 (12 जनवरी सन् 1863)
           12 जनवरी सन् 1863 को कोलकाता में श्री विश्वनाथ के घर में जन्म हुआ। बचपन में बिले नाम से पुकारे जाते थे। बाद में नरेंद्र दत्त  कहलाए। बचपन में सुशील, नटखट व निडर थे।  प्रारंभ में नास्तिक थे।  पिताजी की मृत्यु के पश्चात घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण नौकरी ढूंढने लगे। गरीबी के कारण काली मां से खराब आर्थिक स्थिति में सहायता मांगने कई बार गए पर मां काली के प्रत्यक्ष दर्शन होने पर उनसे भक्ति व बुद्धि ही मांगी।
           17 वर्ष की आयु में स्वामी रामकृष्ण के संपर्क में आये।  स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने अपनी साधना के तेज और अपनी अदृश्यदर्शिनी दृष्टि को इन्हें देकर विवेकानंद बना दिया।  तत्पश्चात् उन्होंने सारे भारत का भ्रमण किया।
           सन् 1893 में शिकागो सर्वधर्म सम्मेलन में गए। वे संसार के अनेक देशों से सांस्कृतिक दिग्विजय प्राप्त कर भारत लौटे। यहां आकर उन्होंने "रामकृष्ण मिशन" की स्थापना की। 4 जुलाई, सन् 1902 में समाधि ली।
           दक्षिण के सागर में स्थित विवेकानंद शिला पर इनका स्मारक बनाया गया।  2 सितंबर 1971 को राष्ट्रपति वराह वेंकट गिरि ने उसका उद्घाटन किया। यहीं से उनके विचारों का प्रचार करने के लिए गृहस्थ  सन्यासियों की योजना बनाई गई है।

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