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सोमनाथ मंदिर का विध्वंस

                  सोमनाथ मंदिर का विध्वंस 

                                     (7 जनवरी)
           गजनी के शासक महमूद गजनवी ने सन् 1025 ईस्वी में सौराष्ट्र (गुजरात) के सोमनाथ मंदिर पर इतिहास प्रसिद्ध आक्रमण किया। उसकी सेना की विशालता से भयभीत सौराष्ट्र के शासक राजा भीम ने कायर की भाँति सौराष्ट्र राज्य छोड़कर भागने के कारण मंदिर के पुजारीगण व आसपास के क्षेत्र के हजारों हिंदू धर्मवीर, जो कोई व्यूहबद्ध प्रशिक्षित सैनिक नहीं थे फिर भी अपने देवता की आन पर सिर माथे लगा, व्यूहबद्ध प्रशिक्षित महमूद गजनवी की सेना से दिन-रात जूझते रहे। हिंदू वीर मुस्लिम सेना के आक्रमण का सामना मंदिर के परकोटे से लगातार करते रहे। मंदिर के परकोटे के ऊपर से शत्रु के मंदिर में घुस आने पर मंदिर पर मंदिर के भीतर भी हिंदू धर्म का सशस्त्र प्रतिकार जारी रहा। अंतिम दम तक धर्मयोद्धा गजनवी कि सेना का सर धड़ से अलग करते रहे। अंत में जब मंदिर पूर्ण रूप से महमूद गजनवी द्वारा जीत लिया गया तब महमूद गजनवी ने जोश में आकर मंदिर के गर्भ गृह में प्रविष्ट होकर स्वयं अपने हाथों से सोमनाथ की प्रतिमा को भंग किया तथा मंदिर की अकूत संपदा लूट ले गया। मुस्लिम इतिहासकारों ने भी यह तथ्य स्वीकार किया है कि अपने मंदिर की रक्षा करते हुए उक्त संग्राम में कम से कम 50,000 हिंदु मारे गए। यदि उन 50,000 में कोई हिंदू यह कहता कि मैं मुसलमान बनने को तैयार हूं तो मुसलमान निसंदेह उसे प्राण दान दे देते क्योंकि उनकी यह कुटिल रणनीति थी। परंतु इस प्रकार का भ्रष्ट जीवन जीने को धिक्कारते हुए 1000 नहीं अपितु 50,000 हिंदू वीरों ने धर्मतीर्थ में अपना प्राणोत्सर्ग किया।

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