समाज जीवन में समयानुकूल परिवर्तन होना चाहिए। हमें पांच बिंदुओं को ध्यान में रखकर राष्ट्रहित में अपने जीवन में अपेक्षित परिवर्तन लाना उपयोगी रहेगा।
1. सामाजिक समरसता - समाज में ऊच-नीच, स्पृश्य-अस्पृश्य, जाति-भेद, जन्म-आधारित भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता को स्थापित करने हेतु हर संभव प्रयास करना है।
2. पर्यावरण संरक्षण - पर्यावरण संरक्षण के लिए पर्यावरण के अनुकूल अपने जीवन-शैली और उसमें व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं राष्ट्रीय दृष्टि समाहित कर दैनंदिन व्यवहार करने की आवश्यकता है। पेड़ों और प्रकृति की पूजा का उपहास करने वाली भोगवाद की सभ्यता से विकसित नव राष्ट्र-राज्य भी आज पर्यावरण संकट पर चिंतित है तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रयत्न कर रहे हैं।
3. कुटुंब प्रबोधन - हिंदू परिवार में हिंदू विचार एवं जीवन-शैली को विकसित करते हुए परिवार कैसे चलाना है, उसके क्या कर्तव्य है? परिवार का क्या महत्व है? इस पर हमें विचार करने की आवश्यकता है।
4. स्व-आधारित जीवन - जीवन के हर क्षेत्र में विदेशी दासता से मुक्त होकर स्व भाषा, भूसा, स्वदेशी आदि पर आग्रह।
5. नागरिक कर्तव्य बोध और शिष्टाचार - नित्य जीवन में एक अच्छे नागरिक के नाते राष्ट्र व समाज हित में जिम्मेदारी पूर्वक कार्य। समय-समय पर समाज में कई विभूतियां, बड़े-बड़े विद्वान, समाज-सुधारक इस धरा पर जन्मे और अपने जीवन में उन्होंने भारत के हिंदू समाज के दोष एवं त्रुटियों को कम करने का प्रयास किया। हिंदू समाज की यह विशेषता रही है कि वह युगानुकूल परिवर्तन को स्वीकार करता है तथा इस हेतु आवश्यक प्रयत्न भी करता है। भारत की दृष्टि से हमारे सामने समकालीन चुनौतियां क्या है, इसको मस्तिष्क रखकर हमें पंच परिवर्तन की संदर्भ में विचार करना है।
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